Saturday, 11 July 2026

किसका है ये तुमको इंतज़ार...मैं हूँ ना।

किसका है ये तुमको इंतज़ार...मैं हूँ ना।

न अतीत की परछाइयों में,
न भविष्य की कल्पनाओं में,
मैं तो बस तुम्हारे अभी में हूँ।

अगल में, बगल में,
आगे भी, पीछे भी,
ऊपर भी और नीचे भी
हर दिशा, हर दशा में हूँ।

न कोई क्षण ऐसा,
न कोई कण ऐसा,
जहाँ मैं न हूँ।

ढूँढ़ सको तो ढूँढ़ लो,
सिर्फ मंदिर मस्जिदों की सीमाओं तक नहीं,
दूर गगन के अनंत फैलाव में भी नहीं,
तुम्हारे अपने अंतर्मन की गहराइयों में झाँक कर तो देख,
मैं हूँ ना।

फिर किसका है ये तुमको इंतज़ार
तुम्हारे हर स्वास में..हर धड़कन में..
हर मौन में भी..मैं हूँ ना
किसका है ये तुमको इंतज़ार...मैं हूँ ना।